Friday, November 9, 2018

उम्मीद

उम्मीद

 खुद को खो कर तूझे

पाने की उम्मीद अभी बाकी हैं ||

टूट कर फिर से जुड़ने

की उम्मीद अभी बाकी है  ||   

शाम ढल चुकी

पर सुबह की उम्मीद अभी बाकी हैं  ||

राँह भटक गया

पर मंजिल की उम्मीद अभी बाकी है  ||   

आँधी तेज़ हैं

पर उसके थमने की उम्मीद अभी बाकी  हैं ||

दिल नाराज हैं

पर उसके मनाने  की उम्मीद अभी बाकी है ||

आसमा दूर हैं

पर उसको छूने की उम्मीद अभी बाकी  हैं ||

आँख नम हैं

पर होंठो पर हसी की उम्मीद अभी बाकी हैं ||

मन मौन हैं

पर कहानी सुनने की उम्मीद अभी बाकी हैं ||

दियां बूझ चुकी

पर रोशन दान से रौशनी की उम्मीद अभी बाकी है ||

हाथ छूट चूका

पर फिर से हाथ थाम लेने का उम्मीद अभी बाकि हैं ||

वो दूर हैं

पर फिर से गले लग जाने का उम्मीद अभी बाकी है ||

कविता अधूरी हैं

पर पूरी होने की उम्मीद अभी बाकी हैं  ||

Saturday, November 3, 2018

जन से जनता

gandhi

जन जन के मन मे है || 
                     
ये नारा ,

देश हमारा जन के द्वारा || 

जन से जन तक 

राह हमार || 

जन ही प्यारा ,

जन ही न्यारा ||  

जन के द्वारा सब कुछ न्यारा ,  

जन प्यारा जन ही है हमारा || 

जन मूझ में तो तुझ में मैं हु ,

बोल कहाँ किस में मै नहीं हु ||  

मै हु जन जन तू भी तो है ,

सचिन कलाम भी तो जन है ||   

रावण कंश भी तो एक जन थे ||  

ना जाने क्यों भटक गये थे ,

राम कृष्ण सब जन ही तो थे  

इसीलिए जन 

कार्य किये थे ||